हल्द्वानी: स्कूल फीस वसूली के खिलाफ सीएम रावत को प्रदर्शनकारियों ने खून से लिखा खत


हल्द्वानी| कोरोनाकाल में अधिकतर प्राइवेट स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं. बच्चे घर बैठे मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं. इस पढ़ाई के एवज में स्कूल स्टूडेंट से फीस मांग रहे हैं, जिसका कई स्तर पर विरोध हो रहा है. हल्द्वानी में स्कूल फी माफी के लिए पिछले 14 दिनों से कई संगठनों के लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी क्रम में बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अपने खून से चिट्ठी लिखकर स्कूल फी माफ करने की मांग की है.

फीस विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हल्द्वानी नगर निगम के पार्षद रोहित कुमार ने पहले अपने एक साथी मदद से सिरिंज के जरिए अपना खून निकलवाया. इसके बाद एक कलम बनाकर अपने खून को स्याही के तौर पर इस्तेमाल किया. रोहित ने कहा कि सरकार को चाहिए कि प्राइवेट स्कूल मालिकों को फीस न लेने का आदेश जारी करे. प्राइवेट स्कूल पैरेंट्स का खून चूस रहे हैं, लेकिन सरकार उन पर लगाम नहीं लगा पा रही है. इसलिए हमने मुख्यमंत्री को खून के जरिए एक पत्र लिखा है.

प्रदर्शन में मौजूद कुछ अभिभावकों ने कहा कि ऑनलाइल क्लास, पढ़ाई के नाम पर एक दिखावा है. फीस वसूली के लिए प्राइवेट स्कूल संचालक ऐसा कर रहे हैं. एलकेजी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से कोई फायदा नहीं होता, क्योंकि न तो उन्हें कुछ समझ आ रहा और नही सभी पैरेंट्स के पास ऑनलाइन पढ़ाने की सुविधा है. अभिभावकों के मुताबिक एक तरफ बिना स्कूल गए बच्चे से पूरी फीस ली जा रही है, दूसरी तरफ घर बैठे इंटरनेट का खर्च भी अच्छा-खासा बढ़ गया है. कोरोना के कठिन दौर में आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे लोग ये दोहरी मार कैसे सहन करें, किसी को समझ नहीं आ रहा.

उत्तराखंड सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2020- 21 में अपनी फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. आदेश के मुताबिक कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन के मद्देनजर निजी स्कूल इस शैक्षणिक सत्र में अपनी फीस नहीं बढ़ा सकते और न ही वे ट्यूशन फीस के अतिरिक्त और कोई फीस ले सकते हैं.

शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जून में जारी इस आदेश में कहा गया है कि ट्यूशन फीस भी केवल वही स्कूल ले सकते हैं जो लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलाते रहे हैं. लेकिन हैरानी की बात ये है कि स्कूल न सिर्फ ट्यूशन फीस ले रहे हैं बल्कि अन्य तरीके के शुल्क भी ले रहे हैं. न देने पर बच्चों के माता-पिता को फोन और मैसेज कर परेशान किया जा रहा है. इसकी लगातार शिकायतें मिल रही हैं.

साभार-न्यूज़ 18

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