भूतिया किले के नाम से जाना जाता है भानगढ़ किला, जानें इतिहास व रोचक तथ्‍य

राजस्थान के अलवर जिले में अरावली पहाडि़यों के बीच सरिस्का अभ्यारण्य की सीमा पर पर मौजूद है भानगढ़ किला. यह किला अपने भूतिया चर्चाओं व घटनाओं को लेकर पूरे देश में प्रसिद्ध है. यह किला अपनी बनावट व सुंदरता से ज्यादा भूतिया किस्सों की वजह से चर्चा में रहता है.

गोला गांव के नजदीक बसे भानगढ़ किले में महल के खंडहर पहाड़ियों की निचली ढलान पर स्थित हैं. इस किले का तालाब वाला क्षेत्र पेड़ों से घिरा हुआ है और महल के परिसर के भीतर एक प्राकृतिक जलधारा तालाब में गिरती है. किले के परिसर में भूतिया अनुभवों की चर्चा और घटनाओं के डर की वजह से अब गाँव इस किले से बहुत दूर हो गए हैं.

किले का इतिहास

भूतिया घटनाओं के लिए प्रसिद्ध इस किले का निर्माण वर्ष 1573 ई. में आमेर के राजा भगवंतदास ने अपने दूसरे बेटे मादो सिंह के लिए स्थापित किया था. मादो सिंह सम्राट अकबर के जनरल मान सिंह का छोटा भाई था. माधो सिंह ने इसे वर्ष 1613 ई. में अपना निवास स्थान बना लिया था.

माधो सिंह के बाद उसके पुत्र छत्र सिंह ने यहां के शासन व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले लिया और शासन करने लगा था. वर्ष 1722 ई. में इसी वंश के हरिसिंह ने यहां के शासन की गद्दी संभाली जिसके साथ ही भानगढ की चमक धीरे-धीरे कम होने लगी. छत्र सिंह के बेटे अजब सिंह ने भानगढ़ के समीप स्थित ही अजबगढ़ का निर्माण करवाया था.

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औरंगजेब के शासन के दौरान उसने हिन्दुओं पर बहुत अत्याचार किये थे, जिस कारण दबाव में आकर हरिसिंह के दोनों बेटो ने इस्लाम को अपना लिया था. जिन्हें बाद में मोहम्मद कुलीज एवं मोहम्मद दहलीज के नाम से जाना गया.

इन दोनों भाईयों के मुसलमान बनने एवं औरंगजेब की शासन पर पकड़ ढीली होने पर जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह ने इन्हे मारकर 1720 ई. में भानगढ़ पर कब्जा कर लिया. बाद में यहां पर धीरे-धीरे जनसंख्या कम होने लगी, वहीं 1783 में अकाल पड़ने के बाद इस शहर को पूरी तरह छोड़ दिया गया.

किले से जुड़े 10 रोचक तथ्‍य

1. इतिहास के अनुसार यह किला अपने निर्माण के बाद करीब 300 वर्षों तक आबाद रहा और कई लड़ाईयां देखी. इसके अंदर लगभग 10000 लोग रहा करते थे.

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2. इस किले से जुड़ी एक प्रचलित कहानी के अनुसार इस किले की एक राजकुमारी रत्नावती पर एक तांत्रिक सिन्धु सेवड़ा का दिल आ गया था और उसने राजकुमारी को हासिल करने के लिए तन्त्र-मंत्र का सहारा लिया जिसका राजकुमारी को पता चल गया और उस तांत्रिक को इसके लिए मृत्यु की सजा दी गई परंतु तांत्रिक ने मरने से पहले इस किले के लोगो को श्राप दिया जिसके कारण ये किला और इसमें रहने वाले सभी लोग श्रापित हो गये.

3. इसी कहानी के अनुसार तांत्रिक की मृत्यु के बाद अजबगढ़ और भानगढ़ में घनघोर युद्ध हुआ तथा किले में रहने वाले सभी लोग और राजकुमारी रत्नावती मारे गए. ऐसी मान्यता है कि आज भी इस किले में मरने वाले लोगों की आत्माएं घूमती है और चींखती रहती है.

4. भानगढ़ किले के अंदर आसपास रहने वाले लोगों व तांत्रिको द्वारा भूत-प्रेत जैसी घटनाएं देखे जाने के दावों के बाद भारत सरकार ने सूरज ढलने के बाद इस किले और आसपास के क्षेत्रों में लोगों का प्रवेश वर्जित कर रखा है.

5. भानगढ़ किले के इस रहस्य को समझने के लिए कई बार वैज्ञानिकों, पैरानॉर्मल एक्सपर्ट, बुद्धिजीवियो ने यहां पर बहुत खोजबीन की लेकिन वो इसके रहस्य से पर्दा नहीं उठा सके.

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6. इन रहस्यमई घटनाओं के कारण ही पुरातत्व विभाग द्वारा ही किले के प्रवेश द्वार पर इसे भू‍तिया घोषित करने का बोर्ड लगाया जा चुका है जिसके अनुसार सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के उपरांत किले में प्रवेश वर्जित है.

7. यहां आसपास रहने वाले लोगों का दावा है कि आज भी रातों में किले से किसी के रोने और चिल्लाने की तेज़ आवाजें आती हैं.

8. इस किले की प्रमुख संरचनाओ में इसके प्रसिद्ध मंदिर सम्मिलित है, जिनमें भगवान सोमेश्वर मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, मंगला देवी मंदिर और केशव राय मंदिर प्रमुख है.

9. भानगढ़ किले की कारीगरी की भी बहुत तारीफ़ की जाती है, इसकी बनावट में मजबूत पत्थरों से लेकर, सुन्दर शिल्पकलाएं, पत्थरों पर हाथो की कारीगिरी साफ़ दिखाई देती है.

10. इस किले के बारे में इतनी डरावनी व प्रचलित कहानियां होने के कारण प्रतिदिन हज़ारो पर्यटक देश और विदेशो से यहां घूमने आते है. यहां तक कि कई बड़े टीवी चैनल इस डरावनी जगह से सम्बन्धित सीरियल, मूवीज और टेली सीरीज भी बना चुके है.

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