गांधी-शास्त्री जयंती विशेष: बापू के सिद्धांत-अहिंसा, शास्त्री जी के आदर्श और सादगी आज भी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत

आज की तारीख भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए ऐतिहासिक है. सत्य, अहिंसा, सिद्धांत, विचार, आदर्श प्रेरणा और सादगी का पूरे विश्व को संदेश और सीख देती है. आज 2 अक्टूबर है। यह तारीख राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिन को लेकर याद की जाती है. इस मौके पर पूरा देश बापू और शास्त्री जी को नमन कर रहा है.

दोनों का पूरा जीवन विश्व के लिए ‘प्रेरणास्रोत’ बना हुआ है. शांति और अहिंसा के प्रबल समर्थक बापू की आज 152वीं जयंती है. वहीं अपनी सादगी से दुनिया भर में पहचान बनाने वाले लाल बहादुर शास्त्री की भी 118वीं जयंती है. दोनों ने ही अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया. महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता और बापू के नाम से भी संबोधित किया जाता है.

‘बापू हमेशा अहिंसा के रास्ते पर चले और एक लाठी के दम पर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया’. महात्मा गांधी के विचारों में सबसे ताकतवर था अहिंसा का विचार. जिसे दुनिया के कई देशों में क्रांति और विरोध का हथियार बनाया गया. बता दें कि 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने प्रस्ताव पारित कर 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के तौर पर मनाने का फैसला किया. तब से लगातार गांधी जी के जन्म दिवस को अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी सहित तमाम नेताओं ने सुबह राजधानी दिल्ली स्थित राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी को पुष्प अर्पित कर नमन किया. महात्मा गांधी की जयंती पर प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर नमन किया. पीएम मोदी ने लिखा कि ‘देश की हर पीढ़ी को कर्तव्य पथ पर चलने के लिए बापू का जीवन और आदर्श प्रेरित करता रहेगा’. पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर नमन किया. उन्होंने ट्वीट किया, ‘पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन, मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित उनका जीवन देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा’. गांधी जी के सिद्धांतों को पूरी दुनिया ने अपनाया, उनका जीवन लोगों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है.

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महात्मा गांधी की 152वीं और लाल बहादुर शास्त्री की 118वीं जयंती है आज

महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जन्म एक ही दिन हुआ था और 2 अक्टूबर को दोनों की जयंती मनाई जाती है. राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था. महात्मा गांधी को उनके अहिंसात्मक आंदोलन के लिए जाना जाता है और साथ ही वैश्विक तौर पर इस दिन गांधी जी के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है. गांधी जी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया. ‘गांधी जी का मानना था कि अहिंसा एक दर्शन है, एक सिद्धांत है और एक अनुभव है, जिसके आधार पर समाज का बेहतर निर्माण करना संभव है’. महात्मा गांधी शांतिप्रिय थे और उन्होंने हमेशा अहिंसा को सबसे पहला धर्म बताया था. गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसक आंदोलन का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया. देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में 2 अक्टूबर, 1904 को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर हुआ था.

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देश की आजादी में लाल बहादुर शास्त्री का खास योगदान रहा. साल 1920 में शास्त्री जी भारत की आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए और स्वाधीनता संग्राम के जिन आंदोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इनमें मुख्‍य रूप से 1921 का असहयोग आंदोलन, 1930 का ‘दांडी मार्च’ और 1942 का ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ उल्लेखनीय हैं. शास्त्री ने ही देश को ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया था.

बता दें कि लाल बहादुर शास्त्री जी का 10 जनवरी 1966 को रूस के ताशकंद शहर में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर ‘करार’ के दूसरे दिन 11 जनवरी को निधन हो गया था. उनकी मृत्यु को आज भी रहस्य माना जाता है. वह मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति थे.

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

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