शानदार जीत की हकदार थीं न्यूजीलैंड की पीएम जेसिंडा आर्डर्न

आइए आज आपको भारत से साढ़े 12 हजार किलोमीटर दूर लिए चलते हैं. बात करेंगे एक ऐसे खूबसूरत और शांत देश की जो विश्व मीडिया में एक बार फिर सुर्खियों में है. जी हां हम बात कर रहे हैं न्यूजीलैंड की. इस देश की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न हैं.

’40 वर्षीय जेसिंडा की छवि पूरे दुनिया भर में एक शानदार और ईमानदार प्रधानमंत्री के रूप में जानी जाती हैं’. एक बार फिर न्यूजीलैंड की जनता ने जेसिंडा पर अपना भरोसा जताया है. शनिवार को हुए यहां हुए आम चुनावों में जनता ने उनकी लिबरल लेबर पार्टी को बंपर जनादेश दिया. इस शानदार जीत के बाद यह आर्डर्न एक बार फिर न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री पद शपथ लेंगी. बात को आगे बढ़ाएं आपको कुछ माह पीछे लिए चलते हैं.

कोरोना महामारी जब विश्व के तमाम देशों में दहशत फैला रही थी. ‘इस महामारी के आगे जब कई देशों ने घुटने तक टेक दिए थे उस समय न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अपनेे देशवासियों को इस वायरस सेेेे बचाने के मजबूती के साथ खड़ी हुईं थी, उन्होंने इस कोरोना संकट काल का डटकर मुकाबला किया. पीएम जेसिंडा के द्वारा अपनाए गए इस खतरनाक वायरस की रोकथाम की वजह से ही न्यूजीलैंड ही दुनिया में एकमात्र ऐसा देश था जिसने अपने आप को कोरोना मुक्त किया था’.

आर्डर्न की कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने की सफल कोशिशें करने को लेकर भी विश्व भर में उनकी लोकप्रियता का ग्राफ ऊपर चढ़ गया था. न्यूजीलैंड की जनता ने अपने प्रधानमंत्री की प्रशंसा की और उनको कोरोना वायरस से निपटने के लिए पूरा सहयोग किया.

‘वह विश्व की दूसरी ऐसा नेता हैं, जिन्होंने इस संवैधानिक पद पर रहने के दौरान 2017 में एक बच्चे को जन्म दिया था और पूरी दुनिया में कामकाजी माताओं के लिए रोल मॉडल बन गईं’. यहां हम आपको बता दें कि 50 लाख की आबादी वाले इस देश में अब कोरोना का खतरनाक काल लगभग सफाया हो चुका है. प्रधानमंत्री की कुशल नीतियों की वजह से ही अब इस देश के लोग खुश हैं और खुली हवा में सांस ले रहे हैं.

न्यूजीलैंड में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जेसिंडा ने लगाई थी कठोर पाबंदियां
बता दें कि इस साल के मार्च में जब न्यूजीलैंड में 100 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई तब प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न बिना देर किए अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए आक्रामक नीति अपनाई थी. उनके इस फैसले पर वहां की जनता ने पूरा सहयोग भी किया. पीएम ने न्यूजीलैंड में कठोर पाबंदियों वाला लॉकडाउन लागू कर दिया.

उनकी यह योजना काम कर गई और देश ने सामुदायिक स्तर पर संक्रमण नहीं होने दिया. उनके इस फैसले को दुनिया भर में सराहा गया था. हालांकि उसके बाद अगस्त महीने में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में कोविड-19 के कुछ नए मामले सामने आने पर एक बार फिर पीएम ने यह तत्काल प्रभाव से दूसरा लॉकडाउन भी लगा दिया.

जिससे यह वायरस आगे नहीं बढ़ पाया. बता दें कि नए मामले सिर्फ उन लोगों में पाए गए जो विदेशों से लौट रहे थे. ऑकलैंड में महामारी फैलने के कारण जेसिंडा ने चुनाव को भी एक महीने के लिए टाल दिया था. यह चुनाव पहले 19 सितंबर को होने वाला था.

प्रधानमंत्री के इस निर्णय की जनता ने खूब सराहना की. देश के इतिहास में इतनी विशाल जीत किसी पार्टी को पहली बार मिली है. जेसिंडा एक बार फिर देश की कमान संभालने के लिए तैयार हैं. आम चुनाव में आर्डर्न को मिली बंपर जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा विश्व के तमाम राष्ट्रअध्यक्षों ने उन्हें बधाई दी है.

50 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत, जेसिंडा दोबारा बनेंगी प्रधानमंत्री
न्यूजीलैंड में हुए आम चुनावों की गिनती पूरी हो चुकी है. जेसिंडा की लिबरल लेबर पार्टी ने कुल मतों में अब तक 49 प्रतिशत मत हासिल किए हैं, जबकि प्रमुख प्रतिद्वंद्वी एवं कंजरवेटिव नेशनल पार्टी को सिर्फ 27 प्रतिशत मत ही प्राप्त हुए हैं.

जेसिंडा आर्डर्न ने अपने दूसरे कार्यकाल के लिए आम चुनाव में शनिवार को शानदार जीत दर्ज की. इस जीत के बाद जेसिंडा ने कहा कि उनकी पार्टी को 50 साल के इतिहास में इस बार जबरदस्त समर्थन मिला है, उन्होंने कहा यह कोई सामान्य समय नहीं है.

पिछले कई सालों में न्यूजीलैंड में सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों को गठबंधन करना पड़ता था, लेकिन इस बार जेसिंडा और उनकी पार्टी अपने बूते सरकार बनाएगी. बता दें कि साल 2017 के चुनाव में लेबर पार्टी के दो अन्य दलों के साथ गठजोड़ करने के बाद जेसिंडा प्रधानमंत्री बनीं थी.

आर्डर्न अपने कार्यकाल में कई कारणों से दुनियाभर में चर्चित रहीं और दूसरे देशों के नेताओं को उनसे सीखने की नसीहत दी जाती है.

न्यूजीलैंड में उनके कार्यकाल के दौरान आतंकी हमले से लेकर प्राकृतिक आपदाओं ने कहर मचाया और आखिर में कोरोना वायरस की महामारी से सामना भी करना पड़ा. इन सभी से सफलता से निपटने के लिए जेसिंडा की काफी सराहना की गई.

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार 

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