पृथ्वी को एस्टेरॉयड के खतरे से बचाने के लिए नासा ने भेजा स्पेसक्राफ्ट, जानिए कैसे मदद करेगा ‘डार्ट मिशन’

वॉशिंगटन|… अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA)ने अंतरिक्ष में एक बड़े मिशन को अंजाम दिया है. धरती को क्षुद्रग्रह यानि ख़तरनाक उल्का या ऐस्टेरॉयड के हमलों से बचाने के लिए नासा के डार्ट मिशन (DART- Double Asteroid Redirection Test) को स्पेसएक्स ने अपने फॉल्कन रॉकेट से अंतरिक्ष के लिए रवाना कर दिया है. यह ऐस्टेरॉयड डायमोर्फोस से टकराएगा.

अगर नासा का यह मिशन सफल होता है तो यह पूरे वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि वैश्विक जगत के लिए भी अहम कामयाबी साबित होगी.

डबल ऐस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (DART Mission) दुनिया का पहला मिशन है जिसका मकसद भविष्य में पृथ्वी की तरफ आने वाले ऐस्टेरॉयड का रास्ता बदलना या उसे निष्क्रिय कर देना है और अगर यह मिशन ऐसा करने में सफल रहता है तो इसे सफल माना जाएगा.

नासा का ये अंतरिक्ष यान डिमोर्फ़ोस नामक एक आकाशीय पिंड से टकराएगा. इस दौरान वैज्ञानिक यह विश्लेषण करेंगे कि अंतरिक्ष यान डिमोर्फ़ोस की गति और रास्ते को कितना बदला पा रहा है.

खासियत
2 हजार करोड़ रुपये खर्च हुआ है इस मिशन पर
169 मीटर लंबाई वाले क्षुद्रग्रह से टकराएगा नासा का यान
610 किलो वजनी और 6 फीट से अधिक लंबा है डार्ट अंतरिक्ष यान

ये है उद्देश्य
ये अंतरिक्ष यान डिमोर्फ़ोस नामक एक आकाशीय पिंड या ऑब्जेक्ट से टकराएगा. इसके जरिए नासा के वैज्ञानिक ये देखना चाह रहे हैं डिमोर्फ़ोस की गति और रास्ते में कितना परिवर्तन हुआ है. बीबीसी के मुताबिक, वैज्ञानिक इसके जरिए क्या करना चाह रहे हैं, उसकी अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर कुछ सौ मीटर के ब्रह्मांडीय मलबे (कॉस्मिक डेबरी) का एक हिस्सा पृथ्वी से टकराता है, तो यह एक पूरे महाद्वीप पर तबाही मचा सकता है.

15 हजार मील प्रति घंटे है रफ्तार
डार्ट प्रक्षेपण के बाद सितंबर 2022 तक अंतरिक्ष के चक्कर लगाते रहेगा और फिर पृथ्वी से 67 लाख मील दूर जाकर अपने लक्ष्य को निशाना बनाएगा. इसकी गति 15000 मील प्रति घंटे की है. आपको बता दें कि ब्रह्मांड में कई लाखों छोटे और बड़े एस्टेरॉयड हैं जो कभी भी धरती से टकरा सकते हैं, हालांकि 100 सालों तक ऐसी आशंका बेहद कम हैं. आमतौर पर जब एस्टेरॉयड अपना रास्ता बदलते हैं तो वह धरती की तरफ आ सकते हैं.

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