संभल जिले में 2024 में हुई हिंसा के बाद प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू समुदाय की आबादी 45% थी, जो अब घटकर लगभग 15% रह गई है। वहीं, मुस्लिम समुदाय की आबादी 55% से बढ़कर 85% हो गई है। रिपोर्ट में इस जनसंख्यात्मक परिवर्तन के लिए बार-बार होने वाली दंगों और ‘सांप्रदायिक तुष्टिकरण’ की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया गया है।
संभल में अब तक 15 बड़े दंगे हो चुके हैं, जिनमें 1947, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 और 2019 शामिल हैं। 2024 की हिंसा 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई, जब कुछ हिंदू पठानों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि संभल में आतंकवादी समूहों जैसे अल-कायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन की उपस्थिति रही है। इसके अलावा, अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों के नेटवर्क की भी जानकारी मिली है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संभल में एक समय 68 तीर्थ स्थल और 19 पवित्र बावलियां थीं, जिनमें से अधिकांश पर अतिक्रमण हो चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए योजना बनाई है, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 मई 2025 को इन कार्यों की आधारशिला रखी।
इस रिपोर्ट ने संभल की सांप्रदायिक स्थिति, जनसंख्यात्मक बदलाव और सुरक्षा चुनौतियों को उजागर किया है, जो राज्य सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है।