राधाअष्टमी विशेष: मोक्ष की प्राप्ति के लिए भक्त राधारानी की करते हैं आराधना

राधे-राधे. आ गई राधाअष्टमी, आओ चले बरसाने. समूचे ब्रज में धर्म की बयार बह रही है. अपनी राधा रानी का जन्मदिन मनाने के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा मथुरा में उमड़ आया है. ब्रज की कुंज गलियों में हर ओर राधे-राधे की गूंज सुनाई दे रही है.

हम बात करेंगे आज राधाअष्टमी की. भगवान श्री कृष्ण की पत्नी राधा का जन्म श्री कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है. इस बार राधा अष्टमी 26 अगस्त, बुधवार को है.

ये त्योहार कृष्ण जन्म अष्टमी की तरह विशेष कर मथुरा, वृंदावन और बरसाना में बड़े ही धूमधाम और श्रद्गा से मनाया जाता है. माना जाता है कि राधा का जन्म इसी दिन हुआ था. इसलिए देश के अन्य जगहों पर श्रद्धालु त्योहार को बड़े ही उत्साह से मनाते हैं. हर साल अपनी राधा रानी का जन्म मनाने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं लेकिन इस बार कोरोना संकट काल की वजह से इस बार इतनी रौनक नजर नहीं आएगी.

कहा जाता है कि श्री कृष्ण के बिना राधा अधूरी है. कृष्ण के नाम से पहले उनका नाम लेना जरूरी है. वेद, पुराण में राधा की प्रशंसा ‘कृष्ण वल्लभ’ के तौर पर की गई है. भगवान श्रीकृष्ण का नाम राधा के साथ लिया जाता है, जबकि उनकी पत्नी रुक्मिणी हैं. राधा अष्टमी के दिन श्रीकृष्ण और राधा की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति राधा जाप से मिलती है.

बरसाना में पूरी रात भक्त अपनी राधारानी की उपासना में लीन हो जाते हैं
कृष्ण नगरी के बरसाना को राधा का जन्म स्थान माना जाता है. बरसाना की गलियों में पूरी रात चहल-पहल रहती है. कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है. कार्यक्रमों की शुरुआत धार्मिक गीतों और भजन से होती है, भक्त इस मौके पर उपवास रखते हैं. आपको बता दें कि हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का जन्मोत्सव मनाया जाता है.

राधा रानी द्वापर युग में प्रकट हुईं थीं. उनका प्राकट्य मथुरा के रावल गांव में वृषभानु की यज्ञ स्थली के पास हुआ था. उनकी माता का नाम कीर्ति और पिता का नाम वृषभानु है‌. इस मौके पर बरसाना में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं.

ऐसा कहा जाता है कि राधा अष्टमी का उपवास रखनेवाले को उनका दर्शन होता है. राधा अष्टमी का त्योहार श्री राधा रानी के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है. राधा रानी भगवान श्री कृष्ण की शक्ति माना जाता है. भगवान कृष्ण के बिना राधा जी की पूजा अधूरी मानी जाती है. मान्यता है कि राधा संपूर्ण जगत को परम आनंद प्रदान करती है. राधा को मोक्ष देने वाली, सौम्य और संपूर्ण जगत की जननी माना जाता है.

इस बार राधा अष्टमी पर बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है. इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में रहेगा. सूर्य सिंह राशि में, बुध सिंह राशि में, राहु और शुक्र मिथुन राशि में, गुरु और केतु धनु राशि में, शनि अपनी स्वंय की राशि मकर में और मंगल अपनी मूल त्रिकोण राशि मेष में स्थित रहेंगे. जिसके अनुसार इस दिन ग्रहों की स्थिति काफी शुभ रहेगी.

मान्यता है, राधा का जाप करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है
राधा-कृष्‍ण के भक्‍तों के लिए राधा अष्‍टमी का विशेष महत्‍व है. मान्यता है कि जो लोग इस व्रत को करते हैं उनके घर में धन की कमी नहीं होती. उन लोगों पर श्रीकृष्ण और राधा की कृपा होती है. यही वजह है कि अपने आराध्‍य कृष्‍ण को मनाने के लिए भक्‍त पहले राधा रानी को प्रसन्‍न करते हैं. कहा जाता है कि राधा अष्‍टमी का व्रत करने सेपाप नष्‍ट हो जाते हैं. राधा जन्मोत्सव की कथा सुनने से भक्त सुखी, धनी और सर्वगुण संपन्न बनता है.

श्रीमद्देवीभागवत् में श्री राधा जी की आराधना के विषय में कहा गया है कि इनकी पूजा न की जाए तो भक्त श्री कृष्ण की पूजा का अधिकार भी नहीं रखता, क्योंकि राधा ही भगवान श्री कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं. घर पर श्रद्धालु राधा रानी की इस प्रकार करें पूजा. इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर लें. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं, उस पर श्री राधा कृष्ण के युगल रूप की प्रतिमा या फोटो विराजित करें.

प्रतिमा पर फूलों की माला चढ़ाएं. चंदन का तिलक लगाएं, साथ ही तुलसी पत्र भी अर्पित करें. राधा रानी के मंत्रों का जाप करें. राधा चालीसा, राधा स्तुति का पाठ करें. श्री राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण की आरती करें. आरती के बाद राधा को भोग चढ़ाएं.

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

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