नई शिक्षा नीति पर बोले पीएम मोदी, मैथमैटिकल सोच पर दिया जोर


नई दिल्‍ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश की नई उम्मीदों, नई आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम बताया है. उन्‍होंने कहा कि इसके पीछे पिछले चार-पांच वर्षों की कड़ी मेहनत है, हर क्षेत्र, हर विधा, हर भाषा के लोगों ने इस पर दिन रात काम किया है. शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने को लेकर देशभर के शिक्षकों से #MyGov पर सुझाव मांगे थे और एक सप्ताह के भीतर 15 लाख से ज्यादा सुझाव मिले, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति को और ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद करेंगे.

पीएम मोदी शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) के तहत ’21वीं सदी में स्कूली शिक्षा’ पर आयोजित एक सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित कर रहे थे, जब उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति को इस तरह तैयार किया गया है कि पाठ्यक्रम को कम किया जा सके और मौलिक चीजों पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके. इसके तहत लर्निंग को एकीकृत एवं अंतर-विषयी, मनोरंजक और आनुभविक बनाने के लिए एक नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क बनाया जाएगा. इस दौरान शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी उपस्थित रहे.

पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक वैज्ञानिक बात को समझने की जरूरत है कि भाषा शिक्षा का माध्यम है, भाषा ही सारी शिक्षा नहीं है. जिस भी भाषा में बच्चा आसानी से सीख सके, वही भाषा पढ़ाई की भाषा होनी चाहिए. कहीं ऐसा तो नहीं कि विषय से ज्यादा बच्चे की ऊर्जा भाषा को समझने में खप रही है. एक टेस्ट, एक मार्क्सशीट क्या बच्चों के सीखने की, उनके मानसिक विकास का मापदंड हो सकता है? आज सच्चाई ये है कि मार्क्सशीट, मानसिक प्रैशरशीट बन गई है. सीख तो बच्चे तब भी कर रहे होते हैं जब वो खेल रहे होते हैं, जब वो परिवार में बात कर रहे होते हैं, जब वो बाहर आपके साथ घूमने जाते हैं. लेकिन अक्सर माता-पिता भी बच्चों से ये नहीं पूछते कि क्या सीखा? वो भी यही पूछते हैं कि मार्क्स कितने आए.

पीएम मोदी ने छात्रों को विभिन्‍न विषयों की जानकारी देने पर भी जोर दिया और कहा, क्या वास्‍तव‍िक दुनिया में हमारे आपके जीवन में ऐसा होता है कि केवल एक ही फील्ड की जानकारी से सारे काम हो जाएं? वास्‍तव में सभी विषय एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. हमारी पहले की जो शिक्षा नीति रही, उसने छात्रों को बहुत बांध भी दिया था. जो विद्यार्थी साइंस लेता है, वह आर्ट्स या कॉमर्स नहीं पढ़ सकता था. ऑर्ट्स-कॉमर्स वालों के लिए मान लिया गया कि ये इतिहास, भूगोल, अकाउंट्स इसलिए पढ़ रहे हैं क्योंकि ये साइन्स नहीं पढ़ सकते. हमें अपने छात्रों को 21वीं सदी के कौशल के साथ आगे बढ़ाना है.

अब सवाल है कि 21वीं सदी के कौशल क्‍या होंगे? तो गहन सोच, रचनात्मकता, सहभागिता, उत्‍सुकता, कम्‍युनिकेशन कुछ ऐसी कुशलताएं हैं, जो मौजूदा दौर की आवश्‍यकता है. बहुत से प्रोफेशन हैं, जिनमें बहुत गहरे कौशल की जरूरत होती है, लेकिन हम उन्हें महत्व नहीं देते. अगर छात्र इन्हें देखेंगे तो एक तरह का भावनात्मक जुड़ाव होगा, उनका सम्‍मान करेंगे. हो सकता है बड़े होकर इनमें से कई बच्चे ऐसे ही उद्योगों से जुड़ें, उन्हें आगे बढ़ाएं. देशभर में हर क्षेत्र की अपनी कुछ न कुछ खूबी है, कोई न कोई पारंपरिक कला, कारीगरी, उत्‍पाद हर जगह के मशहूर हैं. स्टूडेंट्स उन करघों, हथकरघों में जाएं और देखें आखिर ये कपड़े बनते कैसे हैं? स्कूलों में भी ऐसे दक्ष लोगों को बुलाया जा सकता है.

पीएम मोदी ने कहा, हमें आसान और नए-नए तौर-तरीकों को बढ़ाना होगा. उन्‍होंने कहा कि जब शिक्षा को आस-पास के परिवेश से जोड़ दिया जाता है तो उसका प्रभाव विद्यार्थी के पूरे जीवन पर पड़ता है. पूरे समाज पर भी पड़ता है. बच्चों में मैथमैटिकल थिंकिंग और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, ये बहुत आवश्यक है. पीएम मोदी ने कहा कि मैथमैटिकल थिंकिंग का मतलब केवल यही नहीं है कि बच्चे केवल गणित के प्रॉब्लम ही सॉल्व करें, बल्कि ये सोचने का एक तरीका है.

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