बिहार प्री पोल: सीमांचल पर सबकी नज़र! एनडीए और महागठबंधन आमने सामने

पूर्णिया| बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है. एक ओर महागठबंधन के नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव वोट अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं, तो दूसरी ओर एनडीए के बड़े नेता लगातार रैलियां कर रहे हैं. ऐसे में सभी की नजरें सीमांचल इलाके पर टिक गई हैं. Times Now–JVC ओपिनियन पोल के मुताबिक अगर अभी बिहार में चुनाव होते हैं तो एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है. सर्वे का अनुमान है कि एनडीए 243 सीटों वाली विधानसभा में 136 सीटें जीत सकता है. वहीं, महागठबंधन को 75 सीटों तक सीमित बताया गया है. बहुमत का आंकड़ा 122 है.

सर्वे के मुताबिक सीमांचल की 24 सीटों में एनडीए और महागठबंधन दोनों को 10–10 सीटें मिल सकती हैं. जबकि एआईएमआईएम को 3 सीटें मिलने का अनुमान है. एक सीट पर बेहद करीबी मुकाबला होने की संभावना जताई गई है.

सीमांचल पर क्यों सबकी नज़र?
बिहार के सीमांचल इलाके में अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जिले आते हैं. ये राजनीति का अहम केंद्र बन गया है. यहां मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है. औसतन 47% मुस्लिम जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में वोटों का गणित हमेशा चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा है. किशनगंज जिले में तो मुस्लिम आबादी 70% तक है.

2020 का समीकरण
पिछले विधानसभा चुनाव में सीमांचल की 24 सीटों पर बड़े उलटफेर हुए थे.
एआईएमआईएम (ओवैसी की पार्टी) ने पहली बार 5 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था.
भाजपा ने 8 सीटें जीतीं, जबकि जेडीयू ने 4 पर कब्जा किया था.
राजद, जो पहले यहां मजबूत थी, सिर्फ 1 सीट (ठाकुरगंज) पर सिमट गई थी.
कांग्रेस और वाम दल लगभग हाशिये पर चले गए.

एआईएमआईएम को राजद ने दिया था झटका
जून 2022 में बड़ा सियासी बदलाव हुआ. बिहार में AIMIM के 5 में से 4 विधायक राजद (RJD) में शामिल हो गए. अब AIMIM के पास सिर्फ एक विधायक, अख्तरुल इमान ही बचे. इन विधायकों के राजद में जाने से लालू प्रसाद यादव की पार्टी फिर से बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। उनकी संख्या बढ़कर 80 हो गई.

क्यों अहम है यह इलाका?
सीमांचल की राजनीति हमेशा धार्मिक और सामाजिक समीकरणों से प्रभावित रही है. मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा अब तक राजद–कांग्रेस के खाते में जाता रहा, लेकिन 2020 में एआईएमआईएम की एंट्री ने तस्वीर बदल दी. भाजपा और जेडीयू ने भी यहां अपनी पकड़ मजबूत की है. इस बार राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्राओं से महागठबंधन उम्मीदें लगाए बैठा है, लेकिन सर्वे कह रहा है कि मुकाबला आसान नहीं होगा. सीमांचल का हर वोट इस बार बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकता है.

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